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A Poem for Care For You

कुछ करने को दिल करता है,
देश के लिए समर्पित होने को दिल करता है|

संकट में है आज यह देश और दुनिया,
मामूली ही सही, पर वह संकट दूर करने को दिल करता है|

घर बैठ कर पंचपकवान नहीं,
गरीबों को रोटी चावल देने को दिल करता है|

डॉक्टर या पुलिस नहीं हूं मैं , पहली बार इस बात का अफसोस हो रहा है,
समाज सेविका हूं मैं, अब यह साबित करने का दिल कर रहा है|

डर नहीं इस बीमारी का मुझे, एकजुट होकर अब हरायेँगे उसे,
इस बीमारी के बाद का खुशहाल देश देखने को दिल करता है|

जानती हूं मैं, घर में रहकर भी मैं इसके खिलाफ लड़ रही हूं,
पर सिर्फ खुद की नहीं, जनसाधारण की भी सेवा करने को दिल करता है|

देश के लिए समर्पित होने का दिल करता है,
खबर या समाचार देखने का नहीं,
बल्कि वह बनने का दिल करता है|

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